पुण्यतिथि पर बापू को नमन...
पुण्यतिथि पर बापू को नमन...
नफ़रत एक असहाय अवस्था है. इस अवस्था में इंसान अक्सर डर की दीवारों पर हिंसा की छत को चुन लेता है.
गांधी के हत्यारों के नाम पर केवल एक व्यक्ति (नाथूराम गोडसे) तक समेट देना हीं सत्य नहीं है. गांधी पर गोली चलाते समय जैसे गोडसे के हाथ में पिस्तौल था, "ठीक उसी प्रकार गोडसे भी किसी विचारधारा के हाथों एक पिस्तौल था". पिस्तौल नफ़रत और हिंसा के बारूद से भरा हुआ एक पिस्तौल. जिसे संस्थागत रूप से तैयार किया जाता रहा है. यही कारण है कि आज भी हमारे समाज में गोडसे मौजूद है.
एक विचारधारा जो इंसान के दिमाग में नफ़रत भर देती है और उसे हत्यारे में तब्दील कर देती है. ऐसा करने के पीछे उस विचारधारा का एकमात्र उद्देश्य है सत्ता में काबिज रहना. पर उम्मीद अब भी बाकी है. क्योंकि गांधी ने कहा था. "शुद्ध प्रेम में कुछ भी मुश्किल नहीं होता".
नफरत लिखोगे कैसे मेरे नाम के आगे
मोहब्बत के सिवा मेरा कोई तर्जुमा नहीं है
....आदर्श

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