याद करना भी एक प्रतिरोध है.

 याद करना भी एक प्रतिरोध है.

यह जरूरी नहीं की मुट्ठी भींच कर चीखते स्वर में सच कहा जाए. बल्कि सहमे हृदय, कांपती भुजाओं और लड़खड़ाती ज़ुबान से भी वह बात कह दी जाए जो जुल्म के खिलाफ है.
यही सत्याग्रह है.
अम्न के बगैर आजादी अप्रासंगिक है.
गांधी ने अम्न पसंद हिंदुस्तान गढ़ा लेकिन आज की सांप्रदायिक राजनीति हिंदुस्तान की इसी तासीर की हत्या कर रही है.
अवसर और परिस्थितियों से परे, "सच" को किसी किताब के हाशिये पर ही सही, पर लिख दीजिए, और रख दीजिए अलमारी के किसी कोने में. और कहिए....
महात्मा गांधी की जय!
#Gandhi_Jayanti
02/oct/2025

...आदर्श

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