गांधी आज भी मुस्कुराते हैं और कहते हैं, हे राम!

"एक तरफ से खंजर चले, दूसरी ओर लाठी, तीसरी ओर से कुल्हाड़ी से वार हो और चारों तरफ से लात घुसे और गालियां! ऐसे अवसर पर मैं अहिंसक और शांतिपूर्ण रहकर सभी से अहिंसक और शांतिपूर्ण व्यवहार करने के लिए कह सकूं और अंत में अपने चेहरे पर खुशी और होठों पर मुस्कान के साथ मर सकूं, तभी मेरी अहिंसा पूर्ण और सच्ची होगी". कानपुर दंगे में गणेश शंकर विद्यार्थी को मिली ऐसी ही मौत पर गांधी ने ईर्ष्या जताते हुए कहा था.(a dream of death, mkgandhi.org)
25 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने भगत सिंह को चुपके से फांसी दे दी, देश में घोर आक्रोश फैला, देश भर में बंद का आह्वान हुआ. इस दौरान हुए दंगे में शांति बहाल के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर की सड़कों पर निकल पड़े, जहां भीड़ ने उन्हें मार दिया. (कौन थे गणेश शंकर विद्यार्थी? Google कीजिएगा)
बहरहाल, गांधी की यह ख्वाहिश अंग्रेज अधूरा छोड़ गए.
उनकी यह ख्वाहिश पूरी हुई आजाद हिंदुस्तान में. दिल्ली के बिरला भवन में प्रार्थना सभा से पहले एक अतिवादी आतंकी विचारधारा ने एक लड़के (नाम लेने का मन नहीं है) के हाथों गांधी के सीने में तीन गोलियां उतार दी. जो लड़का आजाद भारत का पहला आतंकवादी है. उस विचारधारा के वंशज तब से लेकर आज तक समय-समय पर गांधी के ऊपर खंजर, कुल्हाड़ी, लात-घुसे और गालियों से वार करते रहते हैं. और उनके नेता अपने खूनी हाथों से गांधी पर फूल चढ़ाते रहते हैं.
गांधी आज भी मुस्कुराते हैं और कहते हैं, हे राम!

 #GandhiJayanti 02/0ct/2024

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