फ़हमी साहब नहीं रहे...
ओह!
फ़हमी साहब नहीं रहे...
अपना तो उनसे रिश्ता Instagram से भी थोड़ा पहले का है.
ऐसा लहज़ा मानो अक्टूबर के महीने में "पारिजात" ने धरती पर इत्र रख दिया हो.
हां वही फ़हमी बदायूनी, लबों पर मख़मल लिए एक बुजुर्ग शायर!
काश वो रास्ते में मिल जाए
मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
अलविदा!
20/oct/2024
...आदर्श

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